ओले गिरने से किसानों को हुआ 45 लाख करोड़ का नुकसान

एक कहावत है कि कड़की में आटा गिला यह कहावत भारत के लोगों के लिए बिल्कुल ठीक बैठती है क्योंकि भारत जहां एक ओर कोरोना वायरस की चपेट में है तो वहीं, दूसरी ओर तेज बारिश और ओला वृष्टि की वजह से भारत के किसानों और आम लोगों पर दोहरी मार पड़ी है. भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार ये भारत के मैदानी भागों में होने वाली सबसे भीषण ओलावृष्टि थी जो एक असामान्य घटना के रुप में देखी जा रही है. जिसका किसानों की खेती पर काफी असर हुआ है

ओले गिरने से किसानों को हुआ 45 लाख करोड़ का नुकसान

एक कहावत है कि कड़की में आटा गिला यह कहावत भारत के लोगों के लिए बिल्कुल ठीक बैठती है क्योंकि भारत जहां एक ओर कोरोना वायरस की चपेट में है तो वहीं, दूसरी ओर तेज बारिश और ओला वृष्टि की वजह से भारत के किसानों और आम लोगों पर दोहरी मार पड़ी है. भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार ये भारत के मैदानी भागों में होने वाली सबसे भीषण ओलावृष्टि थी जो एक असामान्य घटना के रुप में देखी जा रही है. जिसका किसानों की खेती पर काफी असर हुआ है 

किसानों पर क्या बीती?

उत्तर प्रदेश से लेकर पंजाब और राजस्थान में तेज बारिश और ओले गिरने से खेती को भारी नुकसान पहुंचा है. उत्तर प्रदेश के सीतापुर ज़िले में सब्जियां उगाने वाले किसानों का कहना है कि उन्होंने बीते बीस सालों में मार्च के महीने में इतनी बारिश और ओले कभी नहीं देखे. उनकी शिमला मिर्च, टमाटर और तमाम दूसरी फसलें पूरी तरह तबाह हो गई हैं उन्हें उम्मीद थी कि ये फसल लगभग 12 लाख रुपये का फ़ायदा देगी लेकिन अब जो लगभग छह लाख रुपये लागत लगाई थी, वो भी नहीं निकलेगी. ऐसे ही चलता रहा तो पता नहीं है कि अगले दो तीन साल सरवाइव भी कर पाएंगे या नहीं.

खेती को कितना नुकसान हुआ?

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के अनुसार इस मौसम में सामान्यत एक दो बार बारिश होती है. लेकिन इस साल कई बार बारिश होने से उन फसलों को नुकसान पंहुच रहा है. इस बारिश से सरसों, गेहूं, सब्जियों, और आम-किनू जैसे फल उगाने वाले किसानों को भारी नुक़सान हुआ है. उदाहरण के लिए उत्तर भारत में इस समय आलू की खुदाई का सीज़न है. इस समय ज़्यादा बारिश की वजह से खेत में आलू की खुदाई नहीं हो पाती और बार-बार पानी गिरने की वजह से आलू सड़ने लगता है.

45 लाख करोड़ का नुकसान

ओले गिरने की वजह से खेतों को जो नुकसान पहुंचा है, इसके बाद किसान एक नई शुरुआत करने की कोशिश कर रहे हैं. किसान की हालत ये है कि चाहें वह कितनी भी परेशानी में क्यों ना हो उन्हें साहूकारों से कर्ज लेना ही पड़ता है. किसान क्रेडिट कार्ड जैसी योजनाएं किसानों को एक बार कर्ज दे देती हैं जिसे साल भर में वापस करना पड़ता है. लेकिन अब जब ऐसी घटनाएं हो जाती हैं तो हमें नई शुरुआत करने के लिए साहूकारों से कर्ज लेने के लिए मजबूर होना पड़ता है. अंतरराष्ट्रीय संस्था ओईसीडी की एक रिपोर्ट के अनुसार साल 2000-01 से लेकर 2016-17 के बीच भारतीय किसानों को 45 लाख करोड़ का नुकसान हुआ है.

मार्च के महीने में क्यों गिरे ओले?

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार मार्च में जो बारिश और ओला वृष्टि हो रही है, ये पश्चिमी विक्षोभ की वजह से हो रही है. एक तरह से तो ये एक सामान्य घटना है. लेकिन इसका संबंध कहीं न कहीं जलवायु परिवर्तन से भी है क्योंकि बीती सर्दियों में 15 से 20 दिनों का तीव्र सर्दी का समय आया था वो भी बहुत सालों के बाद आया था. इसके साथ ही पांच और छह तारीख़ को जो बारिश हुई है. वह भी काफ़ी समय बाद देखने में आया है.