बरनाला के किसान ने 12 हजार का रिकार्ड तोड़ कमाए 12 लाख रुपये

अगर कुछ कर दिखाने का जज्बा हो तो कोई भी ताकत हमें कामयाब होने से नहीं रोक सकती कुछ ऐसा ही सार्थक कर दिखाया है बरनाला के किसान हरपाल सिंह ने. दरअसल हरपाल की कहानी कुछ इस तरह है हरपाल ग्रेजुएशन के बाद नौकरी के लिए आम युवाओं की तरह कुछ महीने भटकते रहे. कोई पांच हजार दे रहा था तो कोई सात हजार. इतने कम पैसों में परिवार कैसे चलना था, यह बड़ा सवाल था. फिर उन्होंने सोचा कि विदेश चलते हैं लेकिन घर छोड़ने का मन नहीं माना और परिवार के दबाव में आकर खेती शुरू कर दी.

बरनाला के किसान ने 12 हजार का रिकार्ड तोड़ कमाए 12 लाख रुपये

अगर कुछ कर दिखाने का जज्बा हो तो कोई भी ताकत हमें कामयाब होने से नहीं रोक सकती कुछ ऐसा ही सार्थक कर दिखाया है बरनाला के किसान हरपाल सिंह ने. दरअसल हरपाल की कहानी कुछ इस तरह है हरपाल ग्रेजुएशन के बाद नौकरी के लिए आम युवाओं की तरह कुछ महीने भटकते रहे. कोई पांच हजार दे रहा था तो कोई सात हजार. इतने कम पैसों में परिवार कैसे चलना था, यह बड़ा सवाल था. फिर उन्होंने सोचा कि विदेश चलते हैं लेकिन घर छोड़ने का मन नहीं माना और परिवार के दबाव में आकर खेती शुरू कर दी. 

युवा सोच थी और कुछ करने की चाहत भी इसलिए परंपरागत खेती छोड़ स्ट्राबेरी की खेती का फैसला किया. यही फैसला आज लाखों कमाकर दे रहा है और इससे हरपाल दूसरों के लिए मिसाल भी बने है. 44 वर्षीय हरपाल बताते हैं कि उन्होंने महज दो कनाल से स्ट्राबेरी की खेती शुरू की थी. आज छह एकड़ में उगा रहे हैं. सारे खर्चे निकालकर उन्हें प्रति एकड़ दो लाख रुपये की बचत होती है. बतां दें हरपाल ने सोलन यूनिवर्सिटी का दौरा किया. वहां जाकर गर्म मौसम में भी स्ट्राबेरी कैसे उगानी है, उसके बारे में सीखा. 2013 में मिशन शुरू किया. आज नतीजा आपके सामने हैं.

हरपाल की उगाई हुई स्ट्राबेरी आज जालंधर, अमृतसर व चंडीगढ़ समेत हरियाणा की मंडियों में भी जाती हैं. उन्होंने कहा, जब उसने इसकी खेती शुरू की तो लोगों ने कहा, यह बेवकूफी भरा फैसला है. इतनी गर्मी में स्ट्राबेरी कैसे रह पाएगी. अनुकूल मौसम व वातावरण न होते हुए भी उसने यह कर दिखाया. इसकी पैकिंग भी परिवार के सदस्य ही करते हैं. उन्होंने कहा कि पहले-पहले कुछ दिक्कत आई लेकिन अब तो व्यापारी खुद ही आकर ले जाते हैं. साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि लोगों की बातों में आकर आज भी नौकरी कर रहा होता तो प्रोग्रेसिव किसान न बन पाता.