किसान भाई हो जाए सावधान, इस कीटनाशक से है कैंसर का खतरा, कहीं आप तो नहीं करते इसका इस्तेमाल  

किसान भाइयों अगर आप भी व्यापक स्तर पर खेतीबाड़ी के दौरान कुछ चुनिंदा खरपतवारों का इस्तेमाल करते हैं, तो अब आपको सावधानी बरतने की   जरूरत है अन्यथा आपको इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है। वो  इसलिए क्योंकि अभी एक हालिया शोध में ऐसा खुलासा हुआ कि खरपतवार के इस्तेमाल से कैंसर होने का खतरा है,

किसान भाई हो जाए सावधान, इस कीटनाशक से है कैंसर का खतरा, कहीं आप तो नहीं करते इसका इस्तेमाल  
Indian Farmer

किसान भाइयों अगर आप भी व्यापक स्तर पर खेतीबाड़ी के दौरान कुछ चुनिंदा कीटनाशक का इस्तेमाल करते हैं, तो अब आपको सावधानी बरतने की  जरूरत है अन्यथा आपको इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है। वो  इसलिए क्योंकि अभी एक हालिया शोध में ऐसा खुलासा हुआ कि खरपतवार के इस्तेमाल से कैंसर होने का खतरा है, लेकिन सुकून की बात यह है कि किसान  भाइयों को सभी कीटनाशक से नहीं बल्कि उस कीटनाशक से कैंसर का खतरा है, जिसका हमारे किसान भाई व्यापक स्तर पर इस्तेमाल करते हैं। आखिर कौन- सा वो कीटनाशक है, जिससे किसान भाइयों को हो सकता कैंसर का खतरा...जानने के लिए पढ़िए हमारी यह खास रिपोर्ट 

कौन-सा है ये कीटनाशक

इस कीटनाशक का नाम ग्लाइफोसेट है। यह सबसे सस्ते कीटनाशक की फेहरिस्त में शुमार है। हमारे किसान भाई व्यापक स्तर पर इसका इस्तेमाल  करते हैं, लेकिन अभी हालिया शोध में यह खुलासा हुआ है कि इसके इस्तेमाल से एक प्रकार का कैंसर होता है। जिससे अब हमारे किसान भाइयों को सावधानी बरतने की जरूरत है। इस कीटनाशक के खिलाफ १ लाख २५ हजार मुकदमे भी दर्ज किए जा चुके हैं, जिसमें ३० हजार  मुकदमों को निपटा दिया जा चुका है। बारिश के मौसम में इसका व्यापक स्तर पर किसानों द्वारा इस्तेमाल किया जाता है। अधिकांश घास, फूस व खरपतवार को नाश करने के लिए इस कीटनाशक का इस्तेमाल करते हैं।  


1974 में मार्केट में आया था पहली बार 

1974 में पहली मर्तबा ग्लाइफोसाइट कीटनाशक बाजार में आया था। इसके बाद त्रीव गति से इसका इस्तेमाल बढ़ता चला गया, लेकिन अब इसकी उपयोगिता  समेत स्वास्थ्य को बढ़ रहे खतरे को ध्यान में रखते हुए इसकी विशेषता पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं। लेकिन, जब 1974 में यह बाजार में आया था, उस वक्त यह बिल्कुल सुरक्षित था। इससे किसी भी प्रकार का कोई खतरा नहीं था।  लेकिन, अभी हालिया शोध में हुए खुलासे में यह बात निकलकर सामने आई है  कि इससे स्वास्थ्य को खतरा है। 

क्या भारत के पास कोई विकल्प नहीं है 

जैसा कि हमने आपको बताया कि वैसे तो इस खाद का इस्तेमाल पूरी दुनिया भर के किसानों द्वारा किया जाता है, लेकिन अन्य किसी भी देश की तुलना  में भारतीय किसानों द्वारा इस खाद का इस्तेमाल व्यापक पर किया जाता है। हालांकि, ऐसा नहीं है कि भारत के पास इसके इतर कोई विकल्प नहीं है,  बल्कि हमारे पास इससे बेहतर विकल्प भी मौजूद है, लेकिन मौजूदा वक्त में अपनी कम कीमत की वजह से यह किसानों को अपनी तरफ आकर्षित करने में कुछ ज्यादा ही कामयाब रहती है। खैर, अभी जिस तरह की खबर इस खाद को लेकर सामने आई है, उसे देखते हुए अब किसान भाइयों के लिए इसका  इस्तेमाल मुनासिब नहीं होगा।