आरोग्य सेतू एप्लिकेशन में कितना सुरक्षित है आपका डाटा

सरकार ने भले ही इस संकट काल में लोगों को कोरोना से बचाने के लिए आरोग्य सेतू ऐप को लांच किया हो, लेकिन अब सवाल ये भी उठता है कि इस आरोग्य सेतू एप्लिकेशन में आपका डाटा कितना सुरक्षित है.

आरोग्य सेतू एप्लिकेशन में कितना सुरक्षित है आपका डाटा

भले ही सरकार इस एप्लिकेशन का प्रयोग लोगों की सुरक्षा के लिए कर रही हो लेकिन अगर लोगों की निजता की बात की जाए तो जो जानकारी सरकार इकट्ठा कर रही है. उसका इस्तेमाल कब तक होगा और कैसे होगा इसे लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है, जो कि चिंता का विषय है. साइबर क़ानून एक्सपर्ट का मानना है कि ये इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस के ज़रिए इकट्ठा किया जा रहा डेटा जब इस्तेमाल किया जाएगा तो, निजता के अधिकार का हनन तो होगा ही साथ ही सुप्रीम कोर्ट के आदेश का भी उल्लंघन होगा. जिसमें निजता के अधिकार को संवैधानिक अधिकार बताया गया है.

आधार कार्ड से हो सकती है ट्रेसिंग

आधार कार्ड को राशन और दूसरी सरकारी सुविधाओं को भ्रष्टाचार से दूर रखने के लिए लॉन्च किया गया था. आधार कार्ड को लेकर कई बहसें भी हो चुकी हैं. मनी लाड्रिंग और टैक्स चोरी को रोकने के लिए सरकार ने आधार को मोबाइल नंबर से जोड़ दिया गया. ऐसे में हमारे डाटा का प्रयोग कहां होगा हमें भी इसकी सही-सही जानकारी नहीं होती है.

डाटा का हो सकता है गलत इस्तेमाल

सरकार यह कह सकती है कि ट्रेसिंग लोगों को कोरोना से बचाने के लिए की जा रही है, क्योंकि कम्युनिटी ट्रांसमिशन का ख़तरा बढ़ रहा है. इसलिए कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग ज़रूरी है, लेकिन सरकार ऐसी कोई गारंटी नहीं दे रही कि, हालात सुधरने के बाद इस डेटा को नष्ट कर दिया जाएगा. ऐसे में इस बात की पूरी संभावना बनती है कि इस डेटा का गलत प्रयोग भी हो सकता है या फिर अगर से लीक हो गया तो कई लोगों की जानकारी आम हो जाएगी.

हर घंटे भेजें सेल्फी

कर्नाटक सरकार ने कहा था कि लोग हर घंटे अपनी एक सेल्फी लेकर भेजें, लेकिन क्या ये उनकी निजता का हनन नहीं है. इसके अलावा ऐप में लोगों से उनकी पर्सनल चीजें जैसे की सिगरेट पीने के बारे में, ट्रैवल हिस्ट्री के बारे में, पेशे आदि के बारे में पूछा जाएगा. जो कि लोगों कि प्राइवेट लाइफ का हनन हुआ.