अगर कांवड़ यात्रा पर सुप्रीम कोर्ट ने लिया ये फैसला, तो समझिए चुनाव से पहले ही यूपी में जीत जाएगी बीजेपी 

केवल सात महीने शेष रह गए हैं... चुनाव भी किसी ऐसे वैसे राज्य में नहीं बल्कि देश के सबसे बड़े सूबों की फेहरिस्त में शुमार उत्तर प्रदेश में होने वाले  हैं। ऐसे आलम में प्रदेश का सियासी पारा अपने चरम पहुंचना लाजिमी है। वो भी ऐसी स्थिति में जब लगातार कांवड़ यात्रा अपने मुहाने पर दस्तक दे चुका है, तो सियासी  स्थितियों का पेजीदा होना लाजिमी है।

अगर कांवड़ यात्रा पर सुप्रीम कोर्ट ने लिया ये फैसला, तो समझिए चुनाव से पहले ही यूपी में जीत जाएगी बीजेपी 
CM YOGI

केवल सात महीने शेष रह गए हैं... चुनाव भी किसी ऐसे वैसे राज्य में नहीं बल्कि देश के सबसे बड़े सूबों की फेहरिस्त में शुमार उत्तर प्रदेश में होने वाले  हैं। ऐसे आलम में प्रदेश का सियासी पारा अपने चरम पहुंचना लाजिमी है। वो भी ऐसी स्थिति में जब लगातार कांवड़ यात्रा अपने मुहाने पर दस्तक दे चुका है, तो सियासी  स्थितियों का पेजीदा होना लाजिमी है। जी हां.. बिल्कुल ठीक ही पढ़ रहे हैं आप...आगामी २५ जुलाई से शुरू होने जा रहे कांवड़ा यात्रा को लेकर प्रदेश में सियासी बवाल होने की पूर्ण संभावना जताई जा रही है।

बता दें कि कोरोना के कम होते मामलों को ध्यान में रखते हुए योगी आदित्यनाथ कांवड़ यात्रियों के कांवड़ यात्रा पर जाने की इजाजत दे चुके हैं, लेकिन विगत  दिनों कुंभ मेले में जिस तरह से कोरोना का तांडव दिखा और तत्कालीन मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने जिस तरह का बेतुका बयान दे दिया था, उसे लेकर सियासी जमकर सियासी बवाल देखने को मिला था। अब कुछ ऐसा ही सियासी बवाल उत्तर प्रदेश में भी होने की संभावना जताई जा रही है। वो भी ऐसी स्थिति में जब आगामी ७ माह बाद प्रदेश में चुनाव होने जा रहे हैं। वो इसलिए, क्योंकि योगी आदित्यनाथ कांवड़ यात्रियों को कांवड़ लाने की इजाजत दे चुके हैं, लेकिन अब इस पूरे मामले पर सुप्रीम कोर्ट हस्तक्षेप कर चुका है। कोर्ट ने इस फैसले की वजह से प्रदेश सरकार को नोटिस जारी कर उससे जवाब तलब किया है। इसे लेकर कोर्ट में अब सुनवाई भी होनी है। 

मिल सकता है बीजेपी को फायदा 

यहां हम आपको बताते चल कि अगर सुप्रीम कोर्ट कांवड़ यात्रा को निरस्त करने का फैसला करती है, तो जाहिर सी बात है कि इसका फायदा बीजेपी को मिलेगा। अगर सुप्रीम कोर्ट कांवड़ यात्रा को निरस्त करने का फैसला सुनाती है, तो लाजिमी है कि बीजेपी के पक्ष में संवेदनाओं की बयार बहेगी। जिसका फायदा उसे आगामी चुनाव में देखने को मिल सकता है। खैर, अब ऐसे में सुप्रीम कोर्ट क्या कुछ फैसला लेती है। यह तो फिलहाल आने वाला वक्त ही बताएगा। 

कैसा है विपक्षी दलों का रूख 

वहीं, अगर इस पूरे मसले को लेकर विपक्षी दलों के रूख की बात करें, तो चाहे वो कांग्रेस हो या सपा...हर कोई काफी सोच समझकर ही इस मसले पर अपनी राय रखते हुए नजर रहा है। सपा खुले तौर पर तो योगी सरकार के इस फैसले का विरोध करते हुए नजर आ रही है, लेकिन इतना जरूर है कि कोरोना काल  में लोगों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए जरूर कहीं न कहीं इस फैसले की  आलोचना करती दिख रही है। वहीं , कांग्रेस की  कूटनीतिज्ञता  का  अंदाजा आप महज इसी से लगा सकते हैं कि वे इस मसले को लेकर  अब तक खामोश है। अब इस मसले पर निर्णायक भूमिका सुप्रीम कोर्ट की रहेगी। कोर्ट क्या कुछ फैसला लेती है। यह तो फिलहाल आने वाला वक्त ही बताएगा।