अगर आप भी बाबा नीम करोली जी को जानने के इच्छुक हैं? तो पहले पढ़िए ये चमत्कारिक तथ्य!

बाबा नीम करोली जी के मंदिर में आज हजारों भक्तों का आना जाना रहता है। भक्तों की सच्ची श्रद्धा और बाबा नीम करोली के प्रति उनका विश्वास ही इस मंदिर को और जगह से अलग बनाता है। इसी कड़ी में आज हम आपको बाबा नीम करोली जी से जुड़ी कुछ रोचक जानकारियां बताएंगे जिसे जानकर आप भी आश्चर्यचकित हो जाएंगे। 

अगर आप भी बाबा नीम करोली जी को जानने के इच्छुक हैं? तो पहले पढ़िए ये चमत्कारिक तथ्य!
Baba Neem Karoli

बाबा नीम करोली जी के मंदिर में आज हजारों भक्तों का आना जाना रहता है। भक्तों की सच्ची श्रद्धा और बाबा नीम करोली के प्रति उनका विश्वास ही इस मंदिर को और जगह से अलग बनाता है। इसी कड़ी में आज हम आपको बाबा नीम करोली जी से जुड़ी कुछ रोचक जानकारियां बताएंगे जिसे जानकर आप भी आश्चर्यचकित हो जाएंगे। 
बाबा नीम करोली को दुनिया एक चमत्कारी बाबा के रुप में जानती है। इनके भक्त इन्हें हनुमान जी का अवतार मानते हैं। बताया जाता है कि बाबा नीम करोली एक सरल और सहज प्रकार के व्यक्ति थे। उनके बारे में कई किताबें प्रकाशित हुई हैं। आइए, बाबा नीम करोली के बारे में कुछ रोचक तथ्य जानते हैं। 

•    बाबा नीम करोली जी का वास्तविक नाम लक्ष्मीनारायण शर्मा था। जिनका जन्म उत्तर प्रदेश के अकबरपुर गांव में 1900 के आसपास हुआ था। उनके पिता का नाम दुर्गा प्रसाद शर्मा था। बताया जाता है बाबा जी का विवाह 11 वर्ष की आयु में हो गया था और 17 वर्ष की आयु में ज्ञान प्राप्त हो गया था। 

•    बाबा नीम करोली जी ने सन् 1958 में अपने घर को पूर्ण रुप से त्याग दिया था। इसके बाद वे पुरे उत्तर भारत में घूमने लगे और इस दौरान उनका व्यवहार व विचार साधुओं की भांति होने लगा। इस वक्त तक इन्हें लोग लक्ष्मण दास, हांडी वाले बाबा और तिकोनियां वाले बाबा आदि नामों से जानने लगे। 

•   आज लोग बाबा नीम करोली को जानने व समझने के लिए उत्तराखंड के नैनीताल का रुख करते हैं, इसके पीछे की वजह बाबा जी का यहां आश्रम निर्माण करना और इसी स्थान से लोगों के बीच अपने चमत्कारिक गुणों से लोकप्रिय होना था। बता दें कि नैनीताल के नजदीक कैंची धाम में बाबा जी पहली बार सन् 1961 में आए थें और यहां उन्होंने अपने पुराने मित्र पूर्णानंद के साथ मिलकर आश्रम बनाने का निर्माण किया। इसके बाद बाबा नीम करोली ने सन् 1964 में इस आश्रम की स्थापना की। 

•   बाबा नीम करोली के बारे में एक बहुत ही मशहूर किस्सा है कि एक बार वे फर्स्ट क्लास में सफर कर रहें थे। तब बाबा के पास ट्रेन का टिकट चेकर आया लेकिन बाबा जी के पास टिकट नहीं था। इसके बाद उनको अगले स्टेशन ‘नीब करोली’ में ट्रेन से उतार दिया गया। बाबा थोड़ी ही दूर अपना चिपटा उताकर धरती पर गाड़कर बैठ गए। ऑफिशिल्स ने ट्रेन को चलाने का ऑडर दिया गार्ड ने ट्रेन को हरी झंडी दिखाई, लेकिन ट्रेन अपनी जगह से एक इंच भी आगे नहीं बढ़ी। ट्रेन चालक के बार-बार प्रयास करने के बाद भी ट्रेन के नहीं चलने से लोकल मजिस्ट्रेट से सम्पर्क किया गया।  ये मजिस्ट्रेट बाबा जी को पहले से ही जानता था। उसने ऑफिशल्स को बाबा से माफी मांगने और उन्हें सम्मानपूर्वक ट्रेन में बैठाने को कहा। जिसके बाद ऑफिश्लस ने बाबा जी से मांफी मांगी और उन्हें ट्रेन में बैठाया। बाबा के ट्रेन में बैठते ही ट्रेन चल पड़ी और तब से ही बाबा का नाम नीम करोली पड़ गया। बाबा नीम करोली के ऐसे सैंकड़ों चमत्कार हैं, जो उन्होंने अपने जीवनकाल में किए। 

•  बाबा नीम करोली की समाधि नैनीताल से सटे पंतनगर में है। इसे एक ऐसी जगह माना जाता है, जहां पर यदि कोई भी मुराद लेकर जाता है तो वह खाली हाथ नहीं लोटता है। यह बाबा की समाधि स्थल भी है। यहां बाबा जी की मूर्ति के साथ-साथ हनुमान जी की मूर्ति भी है। 

•   कैंची धाम में 15 जून को हर साल मेले का आयोजन होता है और खास बात यह है कि इस मेले में देश से ही नहीं, बल्कि विदेश से भी बाबा जी के भक्तगण आते हैं। बाबा जी के अधिकतर भक्त अमेरिका के हैं। इस वजह से कैंची धाम में अक्सर विदेशियों का आना जाना भी लगा रहता है। बाबा जी के भक्तों ने इस स्थान पर हनुमान जी का भी एक भव्य मंदिर बनाया हुआ है। बताया जाता है कि बाबा नीम करोली हनुमान जी के परम भक्त थें। 

• बाबा जी के प्रमुख भक्तों में एप्पल के मालिक स्टीव जॉब्स, फेसबुक के मालिक मार्क जुकरबर्क और हॉलीवुड एक्ट्रैस जूलिया रॉबर्ट्रस का नाम लिया जाता है। बताया जाता है कि इस धाम की यात्रा के बाद इन सब का जीवन पूरी तरह से बदल गया। बाबा जी ने अपने शरीर का त्याग 11 सितंबर 1973 को वृंदावन में किया था।