चरम पर पहुंचा कर्नाटक का सियासी संकट, येदियुरप्पा दे सकते हैं इस्तीफा 

अभी कुछ दिनों पहले ही उत्तराखंड में जिस तरह से सत्ता परिवर्तन देखने को मिला है। कुछ ऐसा ही सियासी परिवर्तन अब आगामी दिनों में कर्नाटक और त्रिपुरा  में देखने को मिल सकता है। कर्नाटक के मुख्यमंत्री येदियुरप्पा और त्रिपुरा के मुख्यमंत्री विप्लुव देव को दिल्ली बुलाया जा चुका है।

चरम पर पहुंचा कर्नाटक का सियासी संकट, येदियुरप्पा दे सकते हैं इस्तीफा 
Yeddyurappa

अभी कुछ दिनों पहले ही उत्तराखंड में जिस तरह से सत्ता परिवर्तन देखने को मिला है। कुछ ऐसा ही सियासी परिवर्तन अब आगामी दिनों में कर्नाटक और त्रिपुरा  में देखने को मिल सकता है। कर्नाटक के मुख्यमंत्री येदियुरप्पा और त्रिपुरा के मुख्यमंत्री विप्लुव देव को दिल्ली बुलाया जा चुका है। कल येदियुरप्पा की मुलाकात कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से हुई थी तो वहीं आज उनकी मुलाकात बीजेपी के राष्ट्रीय अध्य़क्ष जेपी नड्डा समेत रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह व अमित शाह से भी हो सकती है।

बता दें कि सत्ता परिवर्तन के बीच अब येदियुरप्पा ने बड़ा ही सियासी दांव चल दिया है। उन्होंने बयान जारी कर कहा कि अगर पीएम मोदी मुझसे  इस्तीफा देने के लिए भी कहेंगे तो मैं इसके लिए तैयार रहूंगी। अब कर्नाटक की  सियासत के लिए आज का दिन काफी निर्णायक माना जा रहा है। ऐसे में अब आगे चलकर क्या कुछ फैसला लिया जाता है। यह तो फिलहाल आने वाला वक्त ही बताएगा। 

वहीं, अगर त्रिपुरा की सियासत की बात करें, तो वहां के मुख्यमंत्री विप्लव देव को राजधानी दिल्ली तलब किया जा चुका है। माना जा रहा है कि उनसे भी इस्तीफा लिया जा सकता है और किसी और को त्रिपुरा का मुख्यमंत्री बनाया जा सकता है। ऐसे में अब कर्नाटक समेत त्रिपुका की सियासत क्या कुछ रूख अख्तियार करती है। यह तो फिलहाल आने वाला वक्त ही बताएगा। गौरतलब है कि पिछले कुछ दिनों से जब कभी –भी केंद्रीय नेतृत्व की तरफ से किसी राज्य के मुख्यमंत्री को दिल्ली तलब किया जाता है, तो उसे लेकर चर्चा का सिलसिला शुरू हो जाता है।

सियासी सूरमा इस बात के कयास लगाने में मसरूफ हो जाते हैं कि अब फिर से कुछ बवाल देखने को मिल सकता है। मालूम हो कि इससे पहले उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ था। जब उन्हें एकाएक दिल्ली तबल कर लिया गया था। किसी ने भी इस बात की कभी कल्पना नहीं की थी कि उनसे इस्तीफा लिया जा सकता है। लेकिन, उनके दिल्ली तबल किए जाने के बाद क्या कुछ हुआ। यह हम सब देख ही चुके हैं। खैर, आम शाम तक स्थिति साफ हो जाएगी कि कर्नाटक और त्रिपुरा की सियासत क्या रूख अख्तियार करती है।