जानिए मेथी की लाभकारी खेती करने का तरीका

देशभर में मेथी की खेती की जाती है. ये एक पत्तेदार वाली फसल है. मेथी दूसरे नंबर की सब्जी है जिसको पालक के बाद पत्तेदार या भाजी वाली फसल कहा जाता है.

जानिए मेथी की लाभकारी खेती करने का तरीका

देशभर में मेथी की खेती की जाती है. ये एक पत्तेदार वाली फसल है. मेथी दूसरे नंबर की सब्जी है जिसको पालक के बाद पत्तेदार या भाजी वाली फसल कहा जाता है. साथ ही इसकी गिनती मसालेदार फसलों में की जाती है. इससे देशी दवाएं भी बनाई जाती है. मेथी काफी फायदेमंद होती है. इसमें प्रोटीन, सूक्ष्म तत्त्व विटामिन समेत विटामिन पाया जाता है. जानिए कि मेथी की खेती वैज्ञानिक तरीके से कैसे की जाती है.  

जलवायु

मेथी की खेती के लिए कम तापमान और औसत बारिश वाले इलाके अच्छे रहते हैं. यह पाले को दूसरी फसलों के मुकाबले ज्यादा बर्दाश्त कर लेती है, इसलिए इस की खेती पंजाब, राजस्थान, दिल्ली समेत तमाम उत्तरी राज्यों में होती है.

उपयुक्त भूमि

इसकी खेती सभी तरह की मिट्टियों में हो सकती है, लेकिन दोमट और बालू वाली मिट्टी ज्याद फायदेमंद है, क्योंकि इसमें कार्बनिक पदार्थ होता है. 

भूमि करें तैयार

पहली जुताई मिट्टी पलटने वाले हल से करें. इसके बाद 2-3 जुताईयाँ देशी हल या फिर हैरो से करनी चाहिए. फिर मिट्टी को बारीक और एकसार कर दें. ध्यान रहे कि बोआई के समय खेत में नमी हो.

खाद और उर्वरक

खेत में 150 क्विंटल गोबर की खाद प्रति हेक्टेयर की दर से डालें.

बुवाई के समय 20 किलोग्राम फास्फोरस और 40 किलोग्राम पोटाश प्रति हेक्टेयर की दर से डालें.

मेथी की पैदावार मैगनीज और जिंक देने से बढ़ती है.

बुवाई के बाद 20 किलोग्राम नाइट्रोजन प्रति हेक्टेयर की दर दें.

सिंचाई

मेथी की खेती में करीब 4 बार सिंचाई करनी चाहिए. अगर खेती भाजी की है, तो हर कटाई के बाद सिंचाई करनी चाहिए, लेकिन अगर बीज के लिए फसल कर रहे हो, तो बोआई के 1 महीने बाद और फूल बनते समय सिंचाई करनी चाहिए. 

कटाई और पैदावार

फसल भाजी वाली है, तो पहली कटाई बुवाई के 3 हफ्ते बाद करनी चाहिए. इस वक्त पौधों की ऊंचाई करीब 25-30 सेंटीमीटर तक हो जाती है. वैसे मेथी की कटाई अलग-अलग तरीके से होती है. कभी-कभी पूरा पौधा ही जड़ समेत उखाड़ कर गुच्छे बनाकर बेचा जाता है, तो कभी डालियों को काट कर बेचा जाता है. बता दें कि अगर 1 बार कटाई के बाद बीज लिया जाए, तो औसत पैदावार करीब 6-8 क्विंटल प्रति हेक्टेयर हो जाती है. इसके अलावा 4-5 कटाइयां की जाएं, तो यही पैदावार घट कर करीब 1 क्विंटल प्रति हेक्टेयर रह जाती है. 

 

Author - Vivek Rai