मंगोड़ी ने दी रजनी तेवतिया को नई पहचान और महिलाओं को मिला स्वरोजगार

बुलंदशहर क्षेत्र के गांव बराल के माजरे कमला की मढ़ैया निवासी महिलाओं के हाथ में, जिन्होंने अपने हुनर से गुपचुप तरीके से ही सही लेकिन नाम और दाम दोनों कमा लिए हैं.

मंगोड़ी ने दी रजनी तेवतिया को नई पहचान और महिलाओं को मिला स्वरोजगार

शहर के लोग गांव में रह रहे लोगों के लिए काम आएं या न आएं लेकिन गांव में रह रहे लोगों का काम शहरवासियों को काफी भाता है. उनके हाथों का हुनर उनकी आमदानी का जरीया तो बना ही है, साथ ही उन्हें एक अलग पहचान दिलवाने में भी कारगर साबित होता है. कुछ ऐसा ही हुनर छुपा है बुलंदशहर क्षेत्र के गांव बराल के माजरे कमला की मढ़ैया निवासी महिलाओं के हाथ में, जिन्होंने अपने हुनर से गुपचुप तरीके से ही सही लेकिन नाम और दाम दोनों कमा लिए हैं. 

इन महिलाओं का समूह मंगोड़ी बनाने का काम करता है, इस समूह की प्रमुख भी एक महिला ही है जिनके निर्देशन में यह मंगोड़ी बनाने का काम किया जाता है. वहीं रजनी तेवतिया के निर्देशन में बन रहीं इन बरियों की मांग दक्षिण भारत के राज्यों में लगातार बढ़ रही है. रजनी तेवतिया ने महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए जिले में नई पहल शुरू की है, और घरेलू काम के साथ स्वरोजगार के लिए नई राह बनाई है. महिलां घर बैठे-बैठे पैसे भी कमा सके इसके लिए इन्होंने मंगोड़ी बनाने की काम शुरू किया, औऱ देखते ही देखते यह काम इतना चल गया की अब इनके द्वारा बनाई जा रही मंगोड़ियों की मांग बाकी राज्यों में भी की जा रही है. 

रजनी तेवतिया ने कुछ साल पहले ही इस काम को करना शुरू किया था. तब उनके ग्रुप में ज्यादा लोग नहीं थे, जब इस काम से आमदनी बढ़नी शुरू हुई तो गांव की ओर भी महिलाएं साथ आ गईं और फिर इस समुह ने बड़े स्तर पर बरी बनाने का काम शुरू कर दिया. 

अपने व्यवसाय की बात करते हुए रजनी ने बताया कि एक किलो पोषक बरी तैयार करने के लिए उन्हे 80 रुपये खर्च करना होता है. जबकि उनके द्वारा बनाई जा रही बरी की बाजार कीमत 180 से 200 रुपये प्रति किलो है.   
 

किस तरह बनती है मंगोड़ी
रजनी और उनके समूह द्वारा बनाई जा रही यह बरी काफी खास तरीके से तैयार की जाता है. बरी बनाने के लिए यह मूंग और उड़द की दाल, पालक, मेंथी, ओट्स, जई की गिरी, लहसुन अदरक और विटामिन-ई का मिश्रण मिलाते हैं. रजनी का कहना है कि यह बरी अन्य बरी से पूरी तरह से अलग है. यह बरी पूरी तरह से पौष्टिक हैं और पोषण से भरपूर होने की वजह से इसकी मार्केट डिमांड बढ़ रही है.