बहुत हो गया, अब नहीं चलेगी निजी स्कूलों की मनमानी, किसी ने की ऐसी हरकत तो उसकी खैर नहीं, जानें पूरा माजरा

उत्तर प्रदेश में बीते कई सालों से निजी स्कूलों की मनमानी से अभिभावक परेशान हैं। कभी मनमर्जी फीस की वसूली को लेकर तो कभी उलजुलूल खर्चों को लेकर इन स्कूलों के संचालक अभिभावकों को परेशान करने का एक मौका  तक नहीं छोड़ते हैं।

बहुत हो गया, अब नहीं चलेगी निजी स्कूलों की मनमानी, किसी ने की ऐसी हरकत तो उसकी खैर नहीं, जानें पूरा माजरा
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उत्तर प्रदेश में बीते कई सालों से निजी स्कूलों की मनमानी से अभिभावक परेशान हैं। कभी मनमर्जी फीस की वसूली को लेकर तो कभी उलजुलूल खर्चों को लेकर इन स्कूलों के संचालक अभिभावकों को परेशान करने का एक मौका  तक नहीं छोड़ते हैं। इसे लेकर कई मर्तबा अभिभावकों में आक्रोश देखा जाता रहा है, लेकिन अफसोस मुनासिब वक्त पर माकूल फैसलों के अभाव ने इन निजी स्कूल संचालकों के नापाक इरादों की बिसात को इतना फैला दिया कि बेचारे माता-पिता की पूरी जिंदगी भर की कमाई इनके नापाक इरादों की बिसात  में ही सिमटकर रह जाती है। इससे जहां एक तरफ निजी स्कूल संचालकों की चांदी-चांदी होती तो वहीं अभिभावकों की बेबसी की ओर  कान लगाना वाला  कोई नहीं रहता, लेकिन अब आप खुश हो जाइए, क्योंकि अब ऐसा कुछ नहीं होना वाला है। अब इन निजी स्कूलों की मनमर्जी फीस के नाम पर दादागिरी नहीं चलेगी और न ही  अब किसी अभिभावक  को अपने बच्चों की फीस में कटौती करने के वास्ते अपनी बेबसी की  मार्केटिंग करने की नौबत आएगी।  

देना होगा खर्च की गई राशी का ब्यूरो

उत्तर प्रदेश के प्राईवेट स्कूल अब सूचना के अधिकार (RTI) के तहत आने वाले हैं, जिसका सीध-सीधा मतलब ये हुआ कि अब निजी स्कूलों से कोई भी व्यक्ति इनके द्वारा किये जाने वाले खर्च की धनराशी, स्कूल की फीस से संबंधी जानकारी सूचना के अधिकार के तहत ले सकता है। सूबे के निजी स्कूलों को ये सब जानकारी अनिवार्य रुप से देनी होगी। 

राज्य सूचना आयोग ने यह आदेश जारी किया है, जिसमें राज्य सूचना आयुक्त प्रमोद कुमार ने निजी स्कूलों को आदेश दिया है कि राज्य के सभी निजी स्कूल जन सूचना अधिकारियों की नियुक्ति करें। बता दें कि कुछ समय पहले संजय शर्मा नाम के एक शख्स ने लखनऊ के दो नामी स्कूलों के खिलाफ एक एफआईआर दर्ज करवाई थी, जिसके बाद सूचना आयोग ने इन दोनों स्कूलों को आदेश दिया था कि वे अपने स्कूल में सूचना अधिकारी की नियुक्ति करें, जिससे सूचना अधिकार कानून 2005 के तहत लोगों को जानकारी मिल सकें। इससे पहले स्कूल संचालक कर्ता जानकारी ना देने के पीछे यह वजह बताते थे कि उन्हें राज्य सरकार से कोई फंड नहीं मिलता है और वो सूचना अधिकार कानून के दायरे से बाहर हैं।