बिहार के इतिहास की सबसे भयावह बाढ़,  स्थिति ऐसी कि आपकी रुह कांप जाए!

बिहार में कोरोना के बाद बाढ़ का कहर चरम पर है। यहां पर गांव के गांव जलमग्न हो चुके हैं। लोग परेशान हैं ,हताश है, निराश हैं। इन सब के बाद प्रशासन हाथ पे हाथ धरा बैठा है। बिहार में पिछले साल भी इस प्रकार के हालात थे।

बिहार के इतिहास की सबसे भयावह बाढ़,  स्थिति ऐसी कि आपकी रुह कांप जाए!
Flood in Bihar

कोरोना का असर अभी कम ही नहीं हुआ है कि अब समूचा उत्तर भारत बाढ़ की चपेट में आ चुका है। लोग दर-दर भटकने को मजबूर हैं।  कोई भूख से मर रहा है, तो कोई इलाज ना मिलने की वजह से मर रहा है। इन सब के बीच सियासतदान तमाशबीन बने हुए हैं। हम इन बातों का जिक्र बिहार के संदर्भ में कर रहे हैं। बिहार में बाढ़ ने ऐसा कहर मचा रखा है कि जिससे लोग दहशत में जीने को मजबूर हैं। प्रदेश के कई गांव अब बाढ़ की चपेट में आ चुके हैं। स्तिथि ऐसी है कि जहां पर सिर्फ मजबूरी,  हताशा और सिर्फ लाचारी ही नजर आ रही है, लेकिन कोई हाथ इन लोगों के लिए मदद के रुप में नहीं उठ रहे हैं।   

गोपालगंज हो चुका है जलमग्न..

गोपालगंज के प्रखंड खाप मकसूदपुर से कुछ ऐसी तस्वीरें और खबरें आई जिससे आपके होश उड़ जाएंगे। तबाई का मंजर कुछ ऐसा है कि लोग बेघर हो चुके हैं। खाने को अन्न नहीं है। किसी ने बांस के सहारे खुद के लिए छत का इंतजाम किया है,  तो वहीं किसी ने चौकी को ही अपना आसियाना बनाया हुआ है। हालात की गंभीरता को इसी बात से समझा जा सकता है कि गांव और शहर के बीच संपर्क टूट गया है। स्तिथि इतनी भयानक है कि अगर कोई बीमार भी हो रहा है, तो उसको प्राथमिक उपचार के लिए अस्पताल जाना भी संभव नहीं हो पा रहा है।

 
लोग त्रस्त, प्रशासन मस्त

मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक,  कई लोग अपना दर्द बयां करते हुए कह रहे हैं कि ना अनाज है,  ना घर है और ना मवेशी। जाए तो जाए कहा। सभी तरफ जलभराव है।  अगर ऐसी स्तिथि में कभी स्वास्थ्य खराब भी होता है, तो ये लोग भगवान भरोसे है, क्योंकि कहीं से कहीं तक भी एंबुलेंस की सुविधा नहीं है। कई लोग इस वजह से मजबूर होकर अपनों को खाट बनाकर इधर से उधर ले जाने को मजबूर हैं। ऐसी हालात में प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है। प्रशासन की तरफ से ना तो किसी प्रकार की सुध ली जा रही है और ना ही कोई आश्वासन मिल रहा है। 
इससे पिछले साल भी आपदा आई थी जिसमें बिहार के कई घर उजड़ गए थे, और ऐसा कई सालों से होता आ रहा है। इसके बावजूद भी प्रशासन इतना सुस्त बना रहा। सरकार की तरफ से इसके लिए वक्त रहते कोई भी व्यवस्था नहीं की गई। जिससे बिहार के गांवों की वर्तमान स्तिथि दयनीय बनी हुई है।