जानें 60 साल पहले भारत को राज्यों में बांटने के पीछे क्या था रहस्य ?

जानें 60 साल पहले भारत को राज्यों में बांटने के पीछे क्या था रहस्य ?
जानें 60 साल पहले भारत को राज्यों में बांटने के पीछे क्या था रहस्य ?

महाराष्ट्र और गुजरात दोनों ही राज्य अपनी -अपनी विशेषताओं के कारण दुनिया में प्रसिद्ध है, लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि आजादी से पहले ये दोनों राज्य एक ही थे और बॉम्बे प्रदेश का हिस्सा थे. फिर आंदोलनों के कारण 1 मई 1960 को महाराष्ट्र और गुजरात दोनों राज्यों को बॉम्बे प्रदेश से अलग कर दिया गया. इसी के साथ आज 1 मई 2020 को ये दोनों राज्य 60 साल के हो गए. महाराष्ट्र में इस दिन को महाराष्ट्र दिवस, जबकि गुजरात में इसे गुजरात दिवस के रूप में मनाया जाता है.

कैसे अलग हुए बॉम्बे से महाराष्ट्र और गुजरात

ये दोनों राज्य पुनर्गठन अधिनियम 1956 के तहत अलग हुए थे. इस अधिनियम के तहत कन्नड़ भाषी लोगों के लिए कर्नाटक राज्य बनाया गया, जबकि तेलुगु बोलने वालों को आंध्र प्रदेश मिला. इसी तरह मलयालम भाषियों को केरल और तमिल बोलने वालों के लिए तमिलनाडु राज्य बनाया गया. इसी के चलते मराठियों और गुजरातियों को अलग राज्य की मांग तेज हुई. जिसके कारण कई आंदोलन भी हुए.

नेहरू सरकार ने अलग किए राज्य

साल 1960 में पृथक गुजरात की मांग को लेकर महा गुजरात आंदोलन चलाया गया. वहीं संयुक्त महाराष्ट्र समिति का गठन कर महाराष्ट्र राज्य की मांग उठने लगी. इसके बाद 1 मई 1960 को भारत के तत्कालीन नेहरू सरकार ने बॉम्बे प्रदेश को दो राज्यों में बांट दिया, लेकिन मामला यहीं शांत नहीं हुआ. दोनों राज्यों में बॉम्बे को लेकर लड़ाई शुरू हो गई. मराठियों का कहना था कि बॉम्बे उन्हें मिलना चाहिए, क्योंकि वहां पर ज्यादातर लोग मराठी बोलते हैं, जबकि गुजरातियों का कहना था कि प्रदेश की तरक्की में उनका योगदान ज्यादा है. आखिरकार बॉम्बे को महाराष्ट्र की राजधानी बनाया गया.

ऐसे मनाया जाता है महाराष्ट्र और गुजरात दिवस

महाराष्ट्र और गुजरात दोनों अपने-अपने स्थापना दिवस को धूमधाम से मनाते हैं. राज्य के मुख्यमंत्री 'हुतात्मा चौक' पर जाकर उन लोगों को श्रद्धांजलि देते हैं, जिन्होंने महाराष्ट्र राज्य की स्थापना के लिए अपने प्राणों का बलिदान दिया था. ठीक इसी तरह गुजरात में भी विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है.