कोरोना से ठीक होने के बाद लोगों की गल रही हैं हड्डियां, जानें कैसे होते हैं इसके शुरूआती लक्षण, खौफ में आए डॉक्टर 

यूं तो कोरोना वायरस को लेकर बेशुमार खबरें आती जाती रहती हैं, लेकिन अभी जो खबर इस वायरस को लेकर सामने आ रही है, उसने हर किसी को खौफजदा करके रख दिया है। खासकर, वे सभी लोग जो कोरोना वायरस को मात देकर अपनी जिंदगी की शुरूआत कर रहे हैं।

कोरोना से ठीक होने के बाद लोगों की गल रही हैं हड्डियां, जानें कैसे होते हैं इसके शुरूआती लक्षण, खौफ में आए डॉक्टर 
Corona Patient

यूं तो कोरोना वायरस को लेकर बेशुमार खबरें आती जाती रहती हैं, लेकिन अभी जो खबर इस वायरस को लेकर सामने आ रही है, उसने हर किसी को खौफजदा करके रख दिया है। खासकर, वे सभी लोग जो कोरोना वायरस को मात देकर अपनी जिंदगी की शुरूआत कर रहे हैं। खबर है कि कोरोना से ठीक होने वाले मरीजों को एवैस्कुलर नेक्रोसिस यानी की बोन डेथ नामक बीमारी हो रही है। यह बीमारी अभी तक उन लोगों में ही सामने आई है, जो कोरोना को मात दे रहे हैं। अभी तक तीन मरीज सामने आ चुके हैं। मुंबई के हिंदुजा अस्पताल में यह मरीज सामने आए हैं। वहीं, ब्लैक फंग्स, व्हाइट फंग्स के बाद यह सर्वाधिक घातक बीमारी बताई जा रही है।  

डॉक्टर भी हैं खौफजदा 

वहीं, मरीजों में इस तरह के मामले सामने आने के बाद डॉक्टर भी खौफजदा हैं। डॉक्टर को इस बात का लगातार डर सता रहा है कहीं आने वाले दिनों में  इनकी संख्या में इजाफा देखने को न मिले। अगर ऐसा हुआ, तो यकीनन यह हम लोगों के लिए चिंता का सबब हो सकता है, लिहाजा खौफजदा हो रही स्थिति पर विराम लगाने के लिए मेडिकल समुदाय अपनी तरफ से लगातार प्रयास करता जा रहा है। खैर, अब इन कोशिशों के क्या परिणाम निकलकर सामने आते हैं। यह तो फिलहाल आने वाला वक्त ही बताएगा।   

 क्या कहते हैं डॉक्टर  

उधर, इस पूरे मामले को लेकर हिंदुजा अस्पताल के चिकित्सा निदेशक डॉ. संजय अग्रवाल कहते हैं कि अभी तक इस बीमारी से पीड़ित किसी भी मरीज में जब इस तरह के मामले सामने आए हैं, उसमें देखा गया है कि मरीज के फीमर  बोने में दर्द होता है। हैरानी की बात यह रही तीनों ही मरीज कोरोना से ठीक हुए हैं। वो तो गनीमत रही कि तीनों ही मरीज चिकित्सक रहे हैं, इसलिए लक्षण पहचानने में कोई समस्या नहीं हुई। सभी मरीजों को अस्पताल भेज दिया गया है, लेकिन इस बीच डॉक्टरों की भी चिंता अपने चरम पर पहुंच चुकी है। ऐसी स्थिति में चिकित्सकों द्वारा क्या कुछ कदम उठाए जाते हैं। यह तो फिलहाल आने वाला वक्त ही बताएगा।