किसानों ने कर दिया ऐसा ऐलान, लगता है फिर मचेगा बवाल, क्योंकि...!

कोरोना की दूसरी लहर के बाद ठंडे बस्ते में पड़े किसान आंदोलन को एक बार फिर हवा देने की कवायद शुरू हो चुकी है। दरअसल, केंद्र सरकार द्वारा अभी तक किसानों की मांग ना मानने से खफा हुए किसान आज कृषि कानून के विरोध में फिर से किसान धरना प्रर्दशन करने के लिए दिल्ली-गाजीपुर बॉर्डर की  ओर रूख कर रहे हैं।

किसानों ने कर दिया ऐसा ऐलान, लगता है फिर मचेगा बवाल, क्योंकि...!
Farmer Protest

कोरोना की दूसरी लहर के बाद ठंडे बस्ते में पड़े किसान आंदोलन को एक बार फिर हवा देने की कवायद शुरू हो चुकी है। दरअसल, केंद्र सरकार द्वारा अभी तक किसानों की मांग ना मानने से खफा हुए किसान आज कृषि कानून के विरोध में फिर से किसान धरना प्रर्दशन करने के लिए दिल्ली-गाजीपुर बॉर्डर की  ओर रूख कर रहे हैं।

कृषि कानून के विरोध में आज यानी (शुक्रवार) को बड़ी संख्या में किसान दिल्ली बॉडर पहुंच रहे हैं। बता दें कि किसान आंदोलन को 7 महिने हो चुके हैं, लेकिन अब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होने के कारण किसान एक बार फिर दिल्ली-यूपी के गाजीपुर बॉडर पर बड़ी संख्या में आ रहे हैं। 

क्या है कृषि कानून के विरोध की वजह?

दरअसल,  केंद्र सरकार द्वारा पारित कृषि कानून में किसान और व्यापारियों को इन विधेयकों से MSP मंडिया खत्म होने की आंशका है। कृषि उत्पादन व्यापार और वाणिज्य विधेयक 2020 में कहा गया है कि किसान अब एपीएमसी मंडियों के बाहर किसी को भी अपनी उपज बेच सकते हैं,  जिस पर कोई शुल्क नहीं लगेगा। वहीं, दूसरी तरफ एपीएसी मंडियों में कृषि उत्पादों की खरीद पर विभिन्न राज्यों में अलग-अलग मंडी शुल्क व अन्य उपकर हैं। इसके चलते आड़तियों और मंडी के कारोबारियों को डर है कि जब मंडी के बाहर बिना शुल्क के कारोबार होगा तो कोई मंडी आना नहीं चाहेगा।

इसके साथ ही इस बिल के लागू होने से किसानों को ये MSP पर फसल की खरीद सरकार बंद कर देगी। कृषि उत्पादन व्यापार विधेयक 2020 में इस संबध में कोई व्याख्या नहीं है कि मंडी के बाहर जो खरीद होगी वह न्यूनतम समर्थन मूल्य के नीचे के भाव पर नहीं होगी।

गोरतलब है कि 7 महिने पहले जब कृषि कानून का विरोध होना शुरु हुआ था, तब उसके कुछ ही दिनों बाद इस आंदोलन ने हवा पकड़ ली थी। तब इस आंदोलन के सहारे कई राजनैतिक पार्टियां जो कि आज विपक्ष में हैं,  ने भी इसका फायदा अपने राजनीतिक उद्धेश्य के लिए उठाया था। अब आने वाले दिनों में यह देखना होगा कि इस आंदोलन की हवा कहा तक पहुंचती है।