जिसने देश के लिए दान किया अपना सबकुछ, आज उसके पास नहीं है ठिकाना

सरकार जो कह दे वो देशवासियों के लिए पत्थर की लकीर है, देश की सेवा करने के लिए लोग कुछ भी कर गुजरते हैं. जिसके कई उदाहरण भी सामने आए हैं, हमार पास्ट में भी कई ऐसे लोग हुए हैं जिन्होंने देश के लिए अपना सब कुछ न्योछावर कर दिया. लेकिन यदि उनकी वर्तमान स्थिति पर नज़र डाली जाए तो आप भी यकीन नहीं कर पाएंगे.

जिसने देश के लिए दान किया अपना सबकुछ, आज उसके पास नहीं है ठिकाना

सरकार जो कह दे वो देशवासियों के लिए पत्थर की लकीर है, देश की सेवा करने के लिए लोग कुछ भी कर गुजरते हैं. जिसके कई उदाहरण भी सामने आए हैं, हमार पास्ट में भी कई ऐसे लोग हुए हैं जिन्होंने देश के लिए अपना सब कुछ न्योछावर कर दिया. लेकिन यदि उनकी वर्तमान स्थिति पर नज़र डाली जाए तो आप भी यकीन नहीं कर पाएंगे. 
 
ऐसी ही एक कहानी यूपी के झांसी जिले से सामने आई है, यहां रहने वाले एक शख्स की कहानी सुनकर आपको यकीन नहीं होगा. मोहन कुशवाहा नाम के एक व्यक्ति ने 1962 के भारत चीन युद्ध के दौरान अपना सब कुछ दान कर दिया था. उन्होंने यह दान तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू की अपील पर किया था, लेकिन आज यह शख्स भुखमरी के कगार पर है. मोहन कुशवाहा फिलहाल झांसी जिले के मऊरानीपुर तहसील क्षेत्र के सकरार गांव में रहते हैं.

देश के लिए अपना सबकुछ न्योछावर करने वाले मोहन कुशवाहा के पास न खुद के रहने का ठिकाना है और न ही खाने की व्यवस्था. इस देश भक्त की ये स्थिति देखकर किसी का भी दिल सहम जाएगा, लेकिन इस मुश्किल परिस्थिती में भी मोहन कुशवाहा का देश सेवा का जज्बा कम नहीं हुआ है. मोहन कुशवाहा 95 साल के हो चुके हैं. वह अपने गांव सकरार में सड़क किनारे एक पन्नी की झोपड़ी बनाकर अपना गुजर-बसर करने को मजबूर हैं.
 
साल 1962 में जब भारत और चीन के बीच युद्ध हुआ था तो देश के प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने आकाशवाणी के माध्यम से देश की जनता से अपील की थी. उन्होंने अपील में कहा था कि देश आर्थिक संकट से जूझ रहा है. इस दौरान उन्होंने भारत के लोगों से सहयोग की अपील की थी. पीएम नेहरू की इस बात से प्रभावित होकर मोहन कुशवाहा ने कुछ पैसे और अपनी मां के कंगन तक दान कर दिए. जब तक युद्ध चलता रहा कुशवाहा तब तक मनीऑर्डर के माध्यम से पैसे भेजते रहे. देश सेवा में सब कुछ न्योछावर कर देने के बाद आज वही देशभक्त गुमनामी की जिंदगी जीने को मजबूर है. दाने-दाने को मोहताज बन गया है.
 
'देश सेवा का जज्बा कायम'

कुशवाहा 95 साल के हैं उम्र के इस पड़ाव पर भी मोहन कुशवाहा का देश सेवा का जज्बा कम नहीं है. वहीं नेताओं या जनप्रतिनिधियों ने उनकी हालत को देखने की जहमत तक नहीं उठाई. 
News Source- News18